संभल में 1978 हिंसा के पीड़ितों को 46 साल बाद मिला इंसाफ, प्रशासन ने दिलाया जमीन पर मालिकाना हक
संभल में 1978 में हुई हिंसा के 46 साल बाद पीड़ितों को इंसाफ मिला है। उन्हें जमीन का मालिकाना हक दिलाया गया है। यह जमीन 10 हजार स्क्वायर फीट से अधिक है।
Divya Samrat Samachar (दिव्य सम्राट समाचार)
संभल में 1978 में हुई हिंसा के 46 साल बाद पीड़ितों को इंसाफ मिला है। उन्हें जमीन का मालिकाना हक दिलाया गया है। यह जमीन 10 हजार स्क्वायर फीट से अधिक है।
यह मंदिर ग्लोरी ऑफ महाराष्ट्र प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है और इस्कॉन का ऐसा पहला मंदिर है जिसमें संस्थापक स्वामी श्रील प्रभुपाद का स्मारक होगा।
जारवा समुदाय को दिए गए पहचानपत्रों से उनकी नागरिकता सुनिश्चित हुई है। साथ ही यह उनकी निजता की रक्षा के लिए एक व्यापक उपाय भी है। इस पहल से उम्मीद जगी है कि भविष्य में इस द्वीप समूह के सभी लोग देश के नागरिक के रूप में मतदाता बना दिए जाएंगे। पढ़ें प्रमोद भार्गव का आर्टिकल-
Delhi Assembly Elections 2025: पूर्व बीजेपी सांसद स्मृति ईरान के अलावा और भी कई नामों पर विचार किया जा रहा है। इसमें बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य और पूर्व महापौर आरती मेहरा, ग्रेटर कैलाश वार्ड से पार्षद शिखा राय और पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी का नाम शामिल हैं
Congress new headquarter 9A Kotla Road: कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में नए मुख्यालय का उद्घाटन किया गया। इसका नाम इंदिरा भवन रखा गया है।
Delhi Chunav 2025: आम आदमी पार्टी ने कहा कि एक तरफ नई दिल्ली विधानसभा से बीजेपी उम्मीदवार परवेश वर्मा खुलेआम सड़कों पर जूते बांट रहे। उसका फोटो और Video बनवा रहे। वहीं दूसरी तरफ जिला निर्वाचन अधिकारी (DM) कह रहे हैं कि ऐसा कुछ हो ही नहीं रहा है।
प्रयागराज में महाकुंभ 2025 परिसर के भीतर एक अस्पताल में लगी आग की घटना के मॉक ड्रिल के वीडियो को गलत तरीके से शेयर किया जा रहा है। वायरल दावा झूठा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता के समापन समारोह में कहा कि सरकार ने खेलों में युवाओं की रुचि बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
बीच मझधार में फंसी इस नैया को बाहर निकालने के लिए कांग्रेस ने एक खास रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। उस रणनीति के तहत कांग्रेस पार्टी ने अपने ही कुछ नेताओं को लेकर ‘Minorities Declaration Committee’ बना दी है।
एक बार फिर चाचा-भतीजे के रिश्तों में तकरार देखने को मिली है। पहले शरद पवार ने साफ कर दिया कि अजित की अब दोबारा पार्टी में वापसी नहीं हो सकती है तो वहीं दूसरी तरफ अजित ने भी एक रोड शो के जरिए चाचा को सियासी संदेश देने का काम कर दिया है।