वसई: नालासोपारा पश्चिम स्थित गौशाला पर वसई-विरार नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई के विरोध में रविवार को हिंदू संगठनों ने विशाल विरोध मार्च निकाला। इस दौरान नगर निगम प्रशासन के खिलाफ लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। हजारों नागरिकों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए।

कुछ दिन पहले नगर निगम के अतिक्रमण विभाग ने नालासोपारा-विरार बाईपास मार्ग के किनारे स्थित एक गौशाला पर कार्रवाई की थी। हिंदू संगठनों का आरोप है कि यह कार्रवाई लापरवाहीपूर्वक की गई, जिसके कारण एक गाय गंभीर रूप से घायल हो गई और उसका सींग टूट गया। इसी घटना के विरोध में रविवार शाम हिंदू संगठनों के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।

विरोध मार्च की शुरुआत नालासोपारा पश्चिम के यशवंत गौरव क्षेत्र से हुई। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, भाजपा पदाधिकारी तथा विभिन्न हिंदुत्ववादी संगठनों के कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए। मार्च नगर निगम मुख्यालय पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने गौ संरक्षण के समर्थन में नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ अपना रोष व्यक्त करते हुए मांगों का ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन के दौरान भाजपा के विपक्षी नेता मनोज पाटिल ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में प्रतिदिन बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहे हैं और वर्तमान में वसई-विरार क्षेत्र में लगभग 6 लाख वर्ग फुट अवैध निर्माण कार्य जारी है। इसके बावजूद नगर निगम इन निर्माणों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा, जबकि गौशाला पर कार्रवाई की गई। उन्होंने पूछा कि आखिर गौशाला को ही निशाना क्यों बनाया गया।

आंदोलन में किन्नर महामंडलेश्वर स्वामी हिमांगी सखी भी प्रमुख रूप से शामिल रहीं। उन्होंने नगर निगम की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जिस प्रकार गरीबों के घरों को अवैध बताकर तोड़ा जाता है, उसी प्रकार गौशाला को भी निर्ममता से ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देता है और उसमें 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास मानता है। ऐसे में गौशाला को तोड़ना करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के समान है।

स्वामी हिमांगी सखी ने मांग की कि नगर निगम प्रशासन इस घटना के लिए हिंदू समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे तथा ध्वस्त की गई गौशाला का उसी स्थान पर पुनर्निर्माण कराया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द उचित कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन नगर निगम मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचकर और अधिक व्यापक रूप धारण करेगा।