पंजाब कांग्रेस में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले टूट का खतरा बना हुआ है। पूर्व CM व जालंधर सांसद चरणजीत चन्नी की अगुआई वाले कांग्रेस के बागी गुट और AICC प्रभारी भूपेश बघेल की चंडीगढ़ में राणा गुरजीत के घर करीब 2 घंटे मीटिंग चली। मीटिंग के बाद बघेल ने कहा- मैं लगातार 5 दिन से चंडीगढ़ में हूं। सभी नेताओं से मिला हूं। मुझे आज राणा गुरजीत ने न्योता दिया था। सभी साथियों से बात हुई। मुलाकात हुई। उन्होंने अपनी बात रखी है। जो पार्टी हाईकमान का फैसला है, किसी को एतराज नहीं है। कुछ बातें हैं, जिसको हमारे साथियों ने रखा। मैंने सभी साथियों को भरोसा दिलाया कि मैं इंचार्ज होने के नाते सभी के हितों का ध्यान रखूंगा। जो जीतने लायक है, उसे जरूर टिकट मिलेगी। कोई भी ये न सोचे कि उसके सिर पर किसी का हाथ नहीं है। मैं अपनी पूरी रिपोर्ट हाईकमान को दूंगा। वहीं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा- हमने बघेल के सामने अपनी बात रखी। कई बार पार्टी में फैसले वापस भी लेने पड़ते हैं। हमें डटकर बोलने वाला नेता चाहिए, हमें समझौता करने वाले नेता की जरूरत नहीं है। मीटिंग का समय सुबह 11 बजे तय किया गया था, लेकिन भूपेश बघेल करीब सवा घंटे की देरी से पहुंचे थे। मीटिंग खत्म होने के बाद वह पंजाब कांग्रेस प्रधान राजा वडिंग के साथ डिफेंडर गाड़ी में रवाना हुए। ड्राइवर सीट पर राजा वडिंग, जबकि उनके साथ वाली सीट पर भूपेश बघेल बैठे नजर आए। कांग्रेस हाईकमान ने चन्नी को 2-3 नेताओं के साथ मिलने को कहा था। फिर भी चन्नी गुट के करीब 80 नेताओं ने यहां पहुंचकर शक्ति प्रदर्शन किया। मीटिंग से पहले बागी गुट ने पूर्व CM चरणजीत चन्नी को 2027 के चुनाव के लिए मुख्यमंत्री चेहरा बनाने की मांग की। मीडिया से बातचीत में चन्नी ने कहा- हम मीटिंग में आए हैं। अंदर बैठकर बात करेंगे। तेल देखेंगे, तेल की धार देखेंगे। हमारा स्टैंड क्लियर है। इससे साफ है कि बघेल की मीटिंग में कोई फैसला न हुआ तो चन्नी बड़ा फैसला ले सकते हैं। हालांकि मीटिंग के बाद चन्नी का कोई बयान सामने नहीं आया। चन्नी गुट का कहना है कि अगर उन्हें प्रधान नहीं बनाना तो फिर CM चेहरा घोषित करें ताकि उनके नाम पर पंजाब में वोटें मांगी जा सकें। हालांकि हाईकमान पहले ही कह चुका है कि वह अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान पद से नहीं हटाएंगे। चन्नी गुट की शर्त के मुताबिक इस मीटिंग में प्रधान राजा वड़िंग को नहीं बुलाया गया है। उधर, चन्नी गुट से प्रभारी की मीटिंग के बीच प्रधान राजा वड़िंग ने कहा- मैं मीटिंग में नहीं जा रहा हूं। जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज होता है, वह मध्यस्थता करते हैं। जरूरी नहीं की हर जगह अध्यक्ष जाएं। कुछ बातें उन्हें भी करनी होती हैं। कांग्रेस में एकता है, तभी बैठक हो रही है। वहीं मीटिंग के बीच वड़िंग के सर्मथक पूर्व कांग्रेस MLA कुलबीर सिंह जीरा ने एक फोटो जारी की। जिसके कैप्शन में लिखा- जंगल में सियार और दूसरे जानवर चाहे कितने भी हों, लेकिन शेर एक ही होता है। और वह अकेला होकर भी पूरे जंगल पर राज करता है। यह सिर्फ बात नहीं, बल्कि साफ संदेश है। मीटिंग से पहले हुईं 2 बड़ी बातें… बघेल 4 दिन बाद चन्नी से मिलने क्यों आए?
चरणजीत चन्नी व उनका गुट राजा वड़िंग की प्रधानगी में 2027 का चुनाव नहीं लड़ना चाहता। हाईकमान ने वड़िंग की प्रधानगी बरकरार रखी तो चन्नी गुट नाराज हो गया। इसके बाद चन्नी ने AICC के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल का बायकॉट कर दिया। चन्नी सीधे राहुल गांधी से मिलना चाहते थे, लेकिन टाइम नहीं मिला। हाईकमान ने उन्हें बघेल से मिलने को कहा। बघेल को भी चन्नी से मिलने के लिए कहा गया। इस मुलाकात के बाद बघेल अपनी पूरी रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल को देंगे। एक्सपर्ट बोले- चन्नी को साइडलाइन नहीं कर सकती कांग्रेस
पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर डॉ कृष्ण कुमार रत्तू का मानना है कि चरणजीत सिंह चन्नी बड़े दलित-सिख नेता हैं। पंजाब में करीब 32% दलित वोट बैंक को देखते हु उन्हें साइडलाइन करना कांग्रेस हाईकमान के लिए आसान नहीं है। सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि मीटिंग में कोई फैसला नहीं होगा क्योंकि बघेल के पास वो शक्तियां नहीं हैं जो चन्नी गुट की शिकायतों पर फैसला ले सके। अगर राहुल गांधी से बात करने के बाद अगर कांग्रेस हाईकमान ने बीच का रास्ता नहीं निकाला तो पार्टी टूट की तरफ जाएगी इस मामले की पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…