इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर करने की सलाह दी है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि या तो वह मेघालय सरकार की अपील पर मामले के गुण-दोष को देखते हुए फैसला करेगी या फिर सोनम को समर्पण करने का निर्देश देकर जांच एजेंसियों को आगे पूछताछ का अवसर देगी। सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें निचली अदालत द्वारा सोनम को दी गई जमानत और मेघालय हाईकोर्ट के उसे बरकरार रखने के आदेश को चुनौती दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। सोनम के वकील को दिए दो विकल्प मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सोनम के वकील से कहा कि यदि वे चाहें तो अदालत मेघालय सरकार की अपील पर उनकी दलीलें सुनकर अंतिम आदेश पारित कर सकती है। दूसरा विकल्प यह है कि सोनम फिलहाल आत्मसमर्पण करे ताकि जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर सकें और इस दौरान जमानत के मुद्दे पर भी विचार किया जा सके। सोनम के कानूनी तर्कों पर भी उठाए सवाल सुप्रीम कोर्ट ने वारदात के बाद सोनम के व्यवहार और कानूनी तर्कों पर भी सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि गिरफ्तारी के समय कारण नहीं बताए जाने का मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया गया? इस पर सोनम के वकील ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा और कहा कि वे गुरुवार तक अपना जवाब दाखिल करेंगे। वहीं, मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोनम की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उसने पुलिस के सामने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया था। ऐसे में बाद में यह कहना कि गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए, कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी मेमो में यदि कोई कमी है तो वह केवल लिपिकीय त्रुटि (क्लेरिकल मिस्टेक) है। जो आरोपी स्वयं पुलिस के सामने उपस्थित होकर समर्पण करता है, वह गिरफ्तारी की प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी आधारों पर राहत नहीं मांग सकता। रंगे हाथ पकड़े जाने पर कारण बताना जरूरी नहीं मेहता ने दलील दी कि कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी के कारण अलग से बताने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति रंगे हाथों पकड़ा जाता है या पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करता है, तो बाद में यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि उसे गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए। अब अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट सोनम रघुवंशी की जमानत और मेघालय सरकार की अपील पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय करेगा। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… टाइपिंग की गलती से गिरफ्तारी अवैध कैसे इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने संकेत दिए कि वह इस कानूनी सवाल को बड़ी बेंच के पास भेज सकती है कि क्या गिरफ्तारी मेमो में केवल टाइपिंग की गलती (टाइपो) होने से गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है और आरोपी को जमानत मिल सकती है। पढे़ं पूरी खबर… राजा हत्याकांड में फिर उठी CBI जांच की मांग राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में उसके भाई विपिन रघुवंशी एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब एक लड़की से जुड़े मामले में सीबीआई जांच हो सकती है, तो लड़के के मामले में क्यों नहीं? ये मामला भी बेहद चर्चित है। दूसरे राज्य का भी एंगल जुड़ा है। राजा रघुवंशी हत्याकांड की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए। पढ़ें पूरी खबर…

राजा हत्याकांड-सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को सरेंडर की सलाह दी:पूछा-गिरफ्तारी का कारण नहीं बताने का मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया; जमानत पर फैसला 23 को
इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर करने की सलाह दी है। जस्टिस […]