पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत सभी लंबित एप्लिकेशन का निपटारा अगले 6 महीने में हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कानून नागरिकता देने के लिए बनाया गया है, न कि किसी की नागरिकता छीनने के लिए। न्यू टाउन में आयोजित सीएए प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में शुभेंदु ने उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय के करीब 300 लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र दिए। उन्होंने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को इस कानून के बारे में गुमराह किया था। अब तक 23,956 प्रमाण पत्र जारी शुभेंदु ने कहा कि अब तक 23,956 नागरिकता प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसमें नई भाजपा सरकार बनने के बाद पिछले 11 हफ्तों में जारी 5,966 प्रमाण पत्र भी शामिल हैं। राज्य भर से कुल 2,30,605 आवेदन प्राप्त हुए हैं। नादिया जिले में सबसे अधिक 10,191 लाभार्थियों को प्रमाण पत्र मिले हैं, जबकि उत्तर 24 परगना में 8,930 लोगों को यह लाभ मिला है। बंगाल में CAA की प्रक्रिया शुरू CM शुभेंदु ने 20 मई को कहा था कि आज हमने कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। CAA के तहत आने वाले 7 समुदायों और 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए लोगों को नागरिकता कानून का लाभ मिलेगा। पुलिस उन्हें हिरासत में नहीं ले सकेगी। CAA क्या है CAA को हिंदी में नागरिकता संशोधन कानून कहा जाता है। इससे पाकिस्तान, बांग्लादेश, और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता मिलने का रास्ता साफ होता है। 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता दी जाएगी। इन तीन देशों के लोग ही इसके तहत नागरिकता के लिए आवेदन कर सकेंगे। लोगों को आवेदन ऑनलाइन करना होगा। आवेदक को बताना होगा कि वे भारत कब आए। पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज न होने पर भी वे आवेदन कर पाएंगे। इसके तहत इन शरणार्थियों के लिए भारत में रहने की न्यूनतम अवधि 5 साल रखी गई है, जबकि अन्य विदेशियों के लिए सामान्य नागरिकता नियम के तहत यह अवधि 11 साल है।

शुभेंदु बोले- CAA के एप्लिकेशन 6 महीने में क्लियर होंगे:किसी की नागरिकता नहीं छिनेगी; आज 300 लोगों को नागरिकता के सर्टिफिकेट दिए
पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत […]