निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को 19 साल बाद नई दिल्ली से कोलकाता पहुंचीं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर समर्थकों ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर तसलीमा ने कहा- ‘उन्हें वापस आकर बहुत अच्छा लगा। कोलकाता उनका दूसरा घर है।' तसलीमा 1993 में उपन्यास लज्जा की वजह से बांग्लादेश से निर्वासित होना पड़ा था। इसके बाद वह कोलकाता आ गई थीं। 2007 में विरोध प्रदर्शन के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था। वे एक अगस्त को पश्चिम बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी और मशहूर लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के साथ एक कार्यक्रम में शामिल होंगी। तसलीमा के स्वागत की फोटोज 2007 में कोलकाता छोड़ना पड़ा था नवंबर 2007 में तस्लीमा को कोलकाता छोड़ना पड़ा था। उस समय उनकी आत्मकथा 'द्विखंडित' के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए थे। किताब पर प्रतिबंध की मांग की थी। इस विरोध के चलते तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने उन्हें राज्य से बाहर भेज दिया था। इसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली ले जाया गया और फिर वे विदेश चली गई थीं। 1994 से निर्वासित जीवन जी रही तस्लीमा तस्लीमा का जन्म बांग्लादेश के मैमनसिंह में हुआ था। वे 1994 से निर्वासित जीवन जी रही हैं। उनके लेखन के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलीं। उनके उपन्यास 'लज्जा' से उन्हें पहचान मिली। इस किताब में भारत में बाबरी विध्वंस के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न को दिखाया गया था, जिसका कट्टरपंथी समूहों ने कड़ा विरोध किया था। ये खबर भी पढ़ें: 19 साल बाद कोलकाता वापसी पर बोलीं तसलीमा-यह घर वापसी: खुशी और दर्द दोनों के साथ लौट रही हूं, एक अगस्त को CM के साथ कार्यक्रम कोलकाता। निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता लौट रही हैं। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए अपने देश लौटने जैसा है। मैं खुशी और दर्द दोनों के साथ लौट रही हूं। तस्लीमा 1 अगस्त को एक कार्यक्रम में शामिल होंगी। इसमें पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी और लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय भी शामिल होंगे। पढ़ें पूरी खबर…