दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर उनसे 8.8 किलोमीटर लंबे मंडी रोड खंड को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने का आग्रह किया। यह खंड दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

अधिकारियों के अनुसार, यह पत्र पिछले एक वर्ष में दिल्ली सरकार द्वारा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को भेजे गए कई अनुरोधों के बाद आया है। NHAI ने इस परियोजना को अपने हाथ में लिया है और दिल्ली सरकार ने एमजी रोड से दिल्ली-हरियाणा सीमा तक मंडी रोड चौड़ा करने और अपग्रेडेशन के लिए अनुरोध किया था। गडकरी को लिखे अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह सड़क इंटरस्टेट ट्रैफिक की सुगम आवाजाही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) में आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से गठित नोडल एजेंसी के निकाय ने 27 सितंबर, 2023 को आयोजित अपनी 68वीं बैठक में इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, “सड़क के रणनीतिक महत्व, वर्तमान और भविष्य की यातायात मांग और राष्ट्रीय राजमार्ग-148A से इसके सीधे संपर्क को देखते हुए, इसे एनएचएआई के अधिकार क्षेत्र में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने गडकरी से प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार करने का आग्रह करते हुए इस बात पर जोर दिया कि इस कदम से दिल्ली-एनसीआर में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

इससे पहले, लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री परवेश साहिब सिंह ने केंद्र सरकार के सामने यह मामला उठाया था। एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में 8 जनवरी 2026 को नितिन गडकरी को पत्र लिखा था। पीडब्ल्यूडी ने 13 जून 2025 को एनएचएआई को एक अनुरोध भेजा था। उत्तरी क्षेत्रीय स्तर की स्थायी समिति की 22वीं बैठक में भी यह मामला उठाया गया था। पीडब्ल्यूडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “बैठकों में कई बार लिखित और मौखिक अनुरोध भेजे गए हैं, लेकिन क्षेत्रीय राजमार्ग विस्तार के तहत एनएचएआई को इस मार्ग के विकास और रखरखाव का कार्यभार सौंपने की औपचारिक मंजूरी अभी तक नहीं मिली है।”

यह सड़क दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है जिससे यह इंटर स्टेट ट्रैफिक के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग बन जाती है। इसके रणनीतिक महत्व, मौजूदा और भविष्य की यातायात मांग और NH-148A के साथ इसकी सीधी कनेक्टिविटी को देखते हुए, दिल्ली सरकार ने एनएचएआई से इस खंड को अपने हाथ में लेने का अनुरोध किया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। मामला निजी स्कूलों की उन याचिकाओं से जुड़ा है जिनमें स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) के गठन के लिए शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा जारी सर्कुलर को चुनौती दी गई है। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें