बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दोनों पार्टनर कमा रहे हैं, तो घर और बच्चे की पढ़ाई का खर्च दोनों को उठाना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका पर की, जिसमें एक पति ने पत्नी और नाबालिग बेटे के लिए तय मासिक गुजारा भत्ता कम करने की मांग की थी। जस्टिस एम एम सथाये की सिंगल बेंच ने पिछले हफ्ते यह आदेश दिया। बेंच ने कहा कि समानता का दावा चुनिंदा तरीके से नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें व्यक्ति को अपनी पत्नी और बेटे को हर महीने 50 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस राशि को घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया है। पत्नी ने घर बदलने से इनकार कर दिया था दोनों का कमाना जरूरी कोर्ट ने कहा- जब दोनों पक्ष कमा रहे हों और लाइफ स्टाइल मेंटेन रखनी है, तो दोनों को योगदान देना होगा। चाहते हैं कि बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, तो दोनों से ही खर्च में योगदान की उम्मीद की जाती है। पति ने कहा था कि कोविड के दौरान नौकरी चली गई थी। अब वह बहुत कम वेतन पर काम कर रहा है और आर्थिक दबाव में है। कोर्ट ने माना कि कोविड महामारी ने कई लोगों के करियर और बिजनेस को प्रभावित किया है, इसलिए व्यक्ति की कमाई कम होने का कारण साफ है।