पंजाब के खडूर साहिब से खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल की रिहाई के लिए चंडीगढ़ में अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के वर्करों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पुलिस को चकमा देते हुए CM भगवंत मान की चंडीगढ़ के सेक्टर 2 स्थित सरकारी कोठी के 1Km नजदीक तक पहुंच गए। इससे सीएम सिक्योरिटी भी हाई अलर्ट हो गई। तुरंत रिजर्व फोर्स मंगाई गई। चंडीगढ़ पुलिस ने भी सख्ती दिखाते हुए सीएम कोठी के करीब पहुंचे लोगों को हिरासत में ले लिया। ये प्रदर्शनकारी असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद सांसद अमृतपाल और सजा पूरी करने के बाद भी जेल में बंद सिखों (बंदी सिखों) की रिहाई की मांग कर रहे थे। ये प्रदर्शनकारी मंगलवार को सबसे पहले मोहाली के गुरुद्वारा अंब साहिब में इकट्‌ठा हुए। वहां से पैदल व गाड़ियों में इनका काफिले ने चंडीगढ़ की तरफ कूच किया। इस दौरान मोहाली में पुलिस ने उन्हें नहीं रोका लेकिन चंडीगढ़ बॉर्डर तक जरूर साथ में गई। जब प्रदर्शनकारी मोहाली से चंडीगढ़ में सेक्टर- 45 से घुसे तो वहां गौशाला चौक पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी। थोड़ी बहस के बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ डाली। पुलिस के लगाए बैरिकेड उठाकर फेंक दिए। यह देखकर पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की बौछारें मार दी। इससे इससे कुछ प्रदर्शनकारियों को चोटें लगीं, जबकि कुछ की पगड़ी उतर गई। इससे कुछ प्रदर्शनकारी भड़क गए और वाटर कैनन पर चढ़कर पानी फेंक रही नोजल का मुंह दूसरी तरफ मोड़ दिया। जिसके बाद प्रदर्शनकारी गाड़ियों और पैदल ही चंडीगढ़ में घुस गए। इसके बाद पुलिस उन्हें रोक नहीं पाई और जगह-जगह पर उनकी बहस होती रही। इस दौरान प्रदर्शनकारी सीएम की कोठी तक जाने की जिद पर अड़े रहे। माहौल बिगड़ा देख प्रदर्शनकारियों की अगुआई कर रहे सांसद अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह और दाखा से MLA मनप्रीत अयाली ने सेक्टर 7-8 चौक के पास प्रशासन को मांग पत्र सौंपा। हालांकि इसके बाद भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और सीएम की कोठी की तरफ बढ़ने लगे। जब वे नजदीक पहुंच गए तो पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। उधर, अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि सरकार हमारे प्रोटेस्ट को गलत दिखाना चाहती है, इसलिए उसने इसमें उपद्रवी घुसा दिए हैं। वही लोग इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। प्रदर्शन से जुड़े PHOTOS… सांसद अमृतपाल कौन, अभी उन्हें रिहा करने की मांग क्यों? अमृतपाल सिंह 2024 में पंजाब की खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। उन्होंने कांग्रेस के कुलबीर सिंह जीरा को करीब 1.97 लाख वोटों से हराया, जो पंजाब की सबसे बड़ी जीतों में शामिल थी। चुनाव के समय वह असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद थे। इससे पहले सितंबर 2022 में उन्होंने एक्टर दीप सिद्धू की मौत के बाद दुबई से आकर 'वारिस पंजाब दे' संगठन की कमान संभाली। 23 अप्रैल 2023 को अमृतपाल को अजनाला थाने पर हमले के आरोप में मोगा से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा एक्ट (NSA) लगाकर असम की डिब्रूगढ़ जेल में भेज दिया गया। पंजाब में 7 महीने बाद चुनाव हैं, ऐसे में उनका संगठन अब राजनीतिक दल अकाली दल (वारिस पंजाब दे) बन चुका है। जिसमें अमृतपाल को सीएम चेहरा घोषित करने के साथ उनके जेल से चुनाव लड़ने का भी ऐलान किया गया है। उनके संगठन का आरोप है कि अमृतपाल पर पंजाब सरकार जानबूझकर NSA की अवधि बढ़ा रही है, जिस वजह से वह खडूर साहिब से लोकसभा प्रतिनिधि होने के बावजूद लोगों के काम नहीं करवा पा रहे हैं। बंदी सिख कौन, उनकी रिहाई की मांग क्यों?
सिख संस्थाओं के मुताबिक बंदी सिख उन सिख कैदियों को कहा जाता है, जिन्होंने विभिन्न मामलों में सजा पूरी कर ली है, लेकिन वे कानूनी, प्रशासनिक या अन्य कारणों से अब भी जेल में हैं। प्रदर्शन से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…