देश के पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार अपने इस्तीफे पर बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘जेन-जी हमारे ही बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें भटकाने की कोशिश की। मैंने पीएम मोदी से बातचीत करने के बाद ही पद छोड़ा।’ उन्होंने कहा, 'जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश के युवाओं के संकल्प और आकांक्षाओं के सामने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं। इसलिए मेरे लिए पद जरूरी नहीं था।’ प्रधान ने ये बात शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में कही। यहां उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम के दौरान बीजू जनता दल के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। NEET पेपर लीक पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के 35 दिन बाद प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। प्रधान ने नारेबाजी पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं; स्पीच की 4 बातें मोदी सरकार में अब तक 4 शिक्षा मंत्री, जोशी को अतिरिक्त प्रभार 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक केंद्र में 4 पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री रहे हैं। इनमें स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान। प्रह्लाद जोशी को प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कभी पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे धर्मेंद्र 29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था। इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था।