गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या केस की शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इलाज नहीं देने पर दो प्राइवेट अस्पतालों और उनके डॉक्टरों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने दोनों अस्पतालों से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने को भी कहा है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘अगर आप अपनी ड्यूटी नहीं निभाते हैं तो आपको डॉक्टर कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। अगर अस्पताल में सुविधा नहीं थी तो बच्ची को दूसरे अस्पताल पहुंचाना चाहिए था। क्या इसलिए इलाज नहीं किया, क्योंकि परिवार गरीब था और आपकी फीस नहीं दे सकता था?’ मामले की सुनवाई अब अगले हफ्ते होगी। पीड़िता के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में SIT या CBI से कराने की मांग की है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि पीड़िता और उसके परिवार की पहचान गोपनीय रखी जाए और उन्हें किसी तरह से परेशान न किया जाए। अब विस्तार से पढ़िए… बेहोशी हालत में मिली थी बच्ची, खून से लथपथ थी ये मामला 16 मार्च, 2026 का है। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाला एक युवक चॉकलेट दिलाने के बहाने 4 साल की बच्ची को अपने साथ ले गया। जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में बच्ची खून से लथपथ और बेहोशी की हालत में मिली। परिजन उसे पहले 2 निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि दोनों अस्पतालों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके बाद बच्ची को गाजियाबाद के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस की भूमिका पर भी जताई थी नाराजगी सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान गाजियाबाद पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था- पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने और जांच शुरू करने में अनावश्यक ढिलाई दिखाई। साथ ही दोनों निजी अस्पतालों- खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर और सेंट जोसेफ (मरियम) अस्पताल से आरोपों पर हलफनामा दाखिल करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ और नंदग्राम थाना प्रभारी को तलब किया था। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है। एसआईटी में तीन वरिष्ठ महिला अधिकारी शामिल हैं। इनमें एक आईजी रैंक की अधिकारी, एक एसपी रैंक की अधिकारी और एक डीएसपी रैंक की अधिकारी हैं। रेप केस में पुलिस ने नहीं लिखी थी FIR पीड़ित पक्ष के वकील का कहना है कि घटना के बाद पुलिस ने मदद करने के बजाय बच्ची के पिता को डरा-धमकाकर चुप रहने को कहा था। FIR भी 17 मार्च को दर्ज हुई, जबकि घटना 16 मार्च की रात की थी। रेप के आरोप के बावजूद पुलिस ने शुरुआती FIR में सिर्फ हत्या की धारा लगाई। न रेप की धारा जोड़ी गई, न ही पॉक्सो एक्ट लगाया गया। 19 मार्च को मुठभेड़ में आरोपी के दोनों पैरों में लगी थी गोली मुकदमा लिखे जाने के अगले दिन 18 मार्च को पुलिस ने आरोपी गौरव प्रजापति को गिरफ्तार किया था। 19 मार्च को जब पुलिस उसे घटनास्थल पर रिकवरी के लिए ले गई थी। तभी आरोपी ने झाड़ियों में जो तमंचा छिपाकर रखा था, उससे पुलिस पर फायर किया। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। आरोपी के दोनों पैरों पर गोली लगी थी। वह घायल होकर गिर पड़ा था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को अस्पताल में भर्ती कराया। ……………………………. संबंधित खबर पढ़िए… SIT करेगी 4 साल की बच्ची से रेप-हत्या की जांच:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जांच निष्पक्ष होनी चाहिए; 3 महिला अफसरों को जिम्मेदारी गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची का रेप और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने यूपी के डीजीपी को SIT गठित करने के निर्देश दिए हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर