भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक हो गए हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, हैकर्स ग्रुप ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने डार्क वेब पर इन दस्तावेजों को अपलोड करने का दावा किया है। इनमें पावर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की लिस्ट, कंट्रोल रूम और अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक किए गए। सर्वर मई में हैक हुआ था, जून में दस्तावेज लीक का दावा किया गया। इसकी जानकारी अब सामने आई है। तमिलनाडु के कुडनकुलम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने माना है कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा का सर्वर हैक किया गया। इसकी जानकारी सरकार को दे दी गई है। डेटा लीक कैसे हुआ, 6 पॉइंट में समझें… न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) रिलायंस के साथ मिलकर मामले की समीक्षा कर रहा है। भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम भी इस डेटा लीक की जांच कर रही है। डेटा लीक कितना खतरनाक परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डार्क वेब पर मौजूद ये दस्तावेज अगर असली हैं, तो इनके जरिए कोई हमलावर न्यूक्लियर पावर प्लांट के सपोर्ट सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकता है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। प्लांट पर 2019 में भी हो चुका साइबर हमला साल 2019 में भी कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस समय NPCIL ने कहा था कि संयंत्र की परिचालन प्रणाली प्रभावित नहीं हुई थी। हैकिंग से कितना खतरा, क्या है इसकी वजह; 5 सवाल-जवाब सवाल: डार्क वेब क्या है, जहां डेटा अपलोड किया गया जवाब: डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य ब्राउजर (जैसे- क्रोम, एज या सफारी) से नहीं खोला जा सकता। इसे एक्सेस करने के लिए टोर ब्राउजर जैसे विशेष ब्राउजर की जरूरत होती है। सवाल: ये हमला सप्लाई चेन अटैक जैसा, वजह क्या है? जवाब: जब हैकर सीधे किसी संस्था पर हमला करने के बजाय उसके ठेकेदार, सॉफ्टवेयर कंपनी या डेटा सेंटर को निशाना बनाते हैं, तो इसे सप्लाई चेन अटैक कहते हैं। इससे असली लक्ष्य तक पहुंचना उनके लिए आसान हो जाता है। सवाल: हैकर्स डेटा डार्क वेब पर क्यों डालते हैं? जवाब: फिरौती मांगने, डेटा बेचने, जासूसी करने, अपनी हैकिंग क्षमता दिखाने या भविष्य के हमलों के लिए जानकारी साझा करने के उद्देश्य से। सवाल: अगर कंट्रोल रूम का लेआउट लीक हो जाए तो खतरा क्या है? जवाब: इससे हमलावरों को पता चल सकता है कि प्लांट के अहम सिस्टम कहां हैं और सुरक्षा व्यवस्था कैसे काम करती है। ऐसी जानकारी भविष्य में साइबर हमला या घुसपैठ की योजना बनाने में मदद कर सकती है। सवाल: भारत के न्यूक्लियर प्लांट की साइबर सुरक्षा कौन करता है? जवाब: भारत में NPCIL, CERT-In, NCIIPC और AERB जैसे संस्थान न्यूक्लियर प्लांट की साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… 6 नए न्यूक्लियर प्लांट बिजली की कमी पूरी करेंगे: सबसे ज्यादा पूर्वांचल में बनेंगे देश में सबसे ज्यादा बिजली की डिमांड यूपी में है। इसको पूरा करने के लिए सरकार 6 न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने जा रही है। इनमें नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) के हिस्से में 3, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) 2 और अडानी ग्रुप 1 पावर प्लांट बना सकते हैं। ये कुल 8400 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट होंगे। पूरी खबर पढ़ें…

भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक:दावा- हैकर्स ने कंट्रोल रूम का लेआउट, सप्लायर्स की लिस्ट डार्क वेब पर डाली
भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक हो गए हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के […]