हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी और यात्रियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त चार्ज पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विमानन क्षेत्र के लिए नए नियमों को अंतिम रूप देने का काम तेज कर दिया गया है। सरकार ने इसके लिए तीन हफ्ते का समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने कहा ‘इसे सात दिन के भीतर प्रकाशित कीजिए। अगर एयरलाइंस पालन नहीं कर रही हैं तो उन्हें जमीन पर खड़ा कर दीजिए।’ मामले की अगली सुनवाई अब 7 सितंबर को होगी। मामला पिछले साल नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जब किराए में बढ़ोतरी, हिडन चार्ज जैसे मामले पर एक याचिका दायर की गई थी। याचिका में बैगेज और अतिरिक्त शुल्क जैसे 4 मुद्दे उठाए याचिका सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन ने पिछले साल नवंबर में दायर की थी। उन्होंने पूरे सिविल एविएशन सेक्टर में ट्रांसपेरेंसी और यात्रियों की सुरक्षा के लिए मजबूत और फ्री रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाने की मांग की है। याचिका में भारत की प्राइवेट एयरलाइन्स की ओर से हवाई किराए और एक्स्ट्रा चार्ज के रूप में होने वाले उतार-चढ़ाव पर कंट्रोल के लिए गाइडलाइंस बनाने की मांग भी की गई है। इस पूरे मामले को 5 सवाल-जवाब से समझिए
1. सवाल: त्योहारों में हवाई टिकट महंगा क्यों हो जाता है? जवाब: मुख्य वजह डायनैमिक प्राइसिंग है। मांग बढ़ने पर सस्ती सीटें जल्दी बिक जाती हैं और बची सीटें महंगी कैटेगरी में चली जाती हैं।
2. सवाल: क्या एयरलाइंस मनमाने तरीके से किराया बढ़ा सकती हैं? जवाब: एयरलाइंस मांग और उपलब्ध सीटों के आधार पर किराया बदलती हैं। मौजूदा व्यवस्था में सरकार सामान्य तौर पर हर टिकट का अधिकतम किराया तय नहीं करती। इसी व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठे हैं।
3. सवाल: क्या एयरलाइंस मनमाने तरीके से किराया बढ़ा सकती हैं? जवाब: सामान्य बाजार आधारित उड़ानों में किराया मांग और उपलब्धता के आधार पर बदलता है। हालांकि एयरलाइंस को लागू नियमों का पालन करना होता है। DGCA किराए की निगरानी करता है। कुछ सरकारी योजनाओं, जैसे UDAN, में अधिकतम किराया तय होता है।
4. सवाल: एक ही फ्लाइट में अलग-अलग यात्रियों का किराया अलग क्यों होता है? जवाब: सीटें अलग-अलग फेयर कैटेगरी में उपलब्ध होती हैं। इसलिए अलग समय पर बुकिंग करने वाले यात्रियों को एक ही फ्लाइट में अलग किराया मिल सकता है।
5. सवाल: टिकट के अलावा कौन-कौन से शुल्क लग सकते हैं? जवाब: अतिरिक्त बैगेज, पसंद की सीट, भोजन और कुछ अन्य वैकल्पिक सेवाओं के लिए अलग शुल्क लिया जा सकता है। टिकट बदलने या रद्द करने पर भी संबंधित शुल्क लागू हो सकते हैं। इनकी राशि और शर्तें एयरलाइन पर निर्भर करती हैं। हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई फरवरी 2026- त्योहारों में हवाई किराया बढ़ाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र से 4 हफ्ते में जवाब मांगा: सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों और इमरजेंसी हालातों में प्राइवेट एयरलाइंस के हवाई किराए बढ़ाने को लेकर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यह एक बहुत गंभीर चिंता का विषय है। वरना, हम 32 पिटीशन पर विचार नहीं करते। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने अदालत को बताया कि यह मामला आम जनता के हित से जुड़ा है। सरकार और संबंधित विभाग इसे हाईलेवल पर देख रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर… मई 2026- सुप्रीम कोर्ट बोला- दो एयरलाइन का किराया अलग-अलग क्यों: एक एयरलाइन ₹8000 चार्ज करती है, दूसरी ₹18000: एक ही दिन, एक ही सेक्टर में उड़ान भरने वाली एक एयरलाइन कुछ अलग हवाई किराया लेती है, जबकि दूसरी एयरलाइनल अलग किराया लेती है। इसे सही किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार यात्रियों को राहत दे। याचिकाकर्ता ने बेंच से कहा- हवाई किराया 300% तक बढ़ जाता है। इस पर बेंच ने मजाक में कहा- वकीलों की फीस भी कई बार 400% तक बढ़ जाती है, अब क्या किया जाए। पढ़ें पूरी खबर…
