सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डायन बताकर महिलाओं की हत्या करने जैसी कुप्रथाएं जारी रहेंगी, तो देश में लोकतंत्र नहीं टिक सकता। कोर्ट ने ओडिशा में 1998 में एक महिला की डायन बताकर हत्या करने के मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने यह फैसला सुनाया। बेंच ने कहा कि इस मामले में महिला की बेटी ने अपनी मां को बेहद क्रूर तरीके से मारे जाते देखा था। क्या है पूरा मामला ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के गांव में फरवरी 1998 में एक लड़की की मौत हुई थी। लड़की के परिवार के सदस्य ने दावा किया था कि लड़की की मौत पीड़ित महिला की डायन विद्या के कारण हुई। इसके बाद आरोपी और उसकी साथी पीड़ित महिला को उसके घर से बाहर खींचकर लाए। दोनों ने उस पर हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना महिला की बेटी ने देखी थी। बेटी की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी और सह-आरोपी को हत्या समेत कई अपराधों में दोषी ठहराया उम्रकैद की सजा सुनाई। सितंबर 2022 में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा। आरोपी बालकु ओराम ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। इसी अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसल सुनाया। बेटी की गवाही के आधार पर सजा बरकरार कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रत्यक्ष सबूत मजबूत हैं। जब किसी मामले में एकमात्र चश्मदीद की गवाही के रूप में प्रत्यक्ष सबूत मौजूद हो, तो केवल उसी के आधार पर दोषी ठहराने में कोई कानूनी रुकावट नहीं है। गवाहों की संख्या नहीं, उनकी गवाही की गुणवत्ता मायने रखती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें ———————————— ये खबर भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट बोला- पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल लगाओ:ज्यादा चीनी-नमक और फैट की जानकारी दो, सरकार ऐसा नहीं करती तो हम आदेश देंगे नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट्स के वॉर्निंग लेबल पर केंद्र सरकार और फूड सेफ्टी अथॉरिटी (FSSAI) को आखिरी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि नमकीन, बिस्किट और चिप्स के पैकेट पर ज्यादा चीनी-नमक और फैट की चेतावनी देने वाले वॉर्निंग लेबल लगाने पर अगर सरकार फैसला नहीं ले पा रही है तो हम आदेश जारी करेंगे। पढ़ें पूरी खबर…