जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भाजपा के 30 साल के किले को ढाह दिया है। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट बांकीपुर में शानदार जीत दर्ज की है। इसे बिहार की राजनीति का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। प्रशांत किशोर की जीत को क्यों टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है, उनके जीतने से क्या बदल जाएगा, समझेंगे; बूझे की नाही में…। प्रशांत किशोर की जीत के बिहार की राजनीति पर 6 बड़े असर होंगे 1. 'जातिवादी मॉडल' का अंत और 'गवर्नेंस' पर तेज होगी चर्चा बिहार की राजनीति दशकों से जाति आधारित समीकरणों (यादव, कुर्मी, राजपूत, भूमिहार, मुस्लिम, EBC, दलित आदि) पर टिकी है। प्रशांत किशोर लगातार जाति से ऊपर और 'विकास-गवर्नेंस' की बात करते रहे हैं। 2. सम्राट चौधरी की बढ़ सकती है मुश्किलें बांकीपुर भाजपा का पारंपरिक किला रहा है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का परिवार 1995 से यहां से जीतता रहा है। प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था- 'यहां हमारी जीत तब ही होगी, जब दशकों से भाजपा को वोट दे रहा एक बड़ा तबका हमारी तरफ शिफ्ट होगा।' प्रशांत किशोर की जीत से तय हो गया कि भाजपा का शहरी, मिडिल क्लास और अपर कास्ट का मजबूत आधार हिल गया है। यह बोरिंग रोड, एसके पुरी (श्रीकृष्णपुरी), उत्तरी/पूर्वी कृष्णापुरी, किदवईपुरी, मंदिरी और बुद्धा कॉलोनी जैसे भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ वाले इलाकों में प्रशांत किशोर की बढ़त से साफ हो गया है। इसका असर यह होगा कि अब राज्यभर में विकल्प नहीं होने और लालू राज के लौटने के डर से भाजपा को वोट दे रहे लोगों को विकल्प मिल जाएगा। इसका सीधा असर भाजपा के कोर वोटरों पर पड़ेगा। 3. RJD-JDU की राजनीतिक हैसियत घटेगी प्रशांत किशोर की यह धमाकेदार जीत नीतीश कुमार/निशांत कुमार और तेजस्वी यादव, दोनों के लिए बड़ा झटका है। दोनों की राजनीति पर इसका आगे बड़ा असर पड़ेगा। इसे ऐसे समझिए… JDU: ‘सुशासन ब्रांड’ और EBC खिसक सकता है RJD: तेजस्वी का M यानी मुस्लिम बिखर सकता है 4. NDA और महागठबंधन में अंदरुनी संतुलन बिगड़ेगा बीते 35 सालों में बिहार में कोई पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाई है। उसे सत्ता की कुर्सी पाने के लिए दूसरे दलों से गठबंधन करना ही पड़ा है। फिलहाल राज्य में दो गठबंधन है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन। NDA में 5 पार्टियां हैं-BJP, JDU, LJP(R), HAM, RLM। महागठबंधन में 7 पार्टियां हैं-RJD, कांग्रेस, माले, CPI, CPI(M), IIP, VIP। प्रशांत किशोर की बांकीपुर में जीत का दोनों गठबंधनों के अंदरूनी समीकरणों पर असर पड़ सकता है। महागठबंधन में तो इसकी शुरुआत भी हो गई है। कांग्रेस और RJD एक-दूसरे पर हमलावर है। 5. वोट-कटवा से आगे बढ़कर एजेंडा सेटर बनेंगे प्रशांत किशोर 2025 बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज को वोट-कटवा कहा गया। पार्टी 238 सीटों पर लड़ी, एक भी नहीं जीत पाई। 237 सीटों पर तो जमानत जब्त हो गई। हालांकि, एक सीट की जीत से गेम-चेंजर बनना आसान है, लेकिन उसे बनाए रखना मुश्किल। अगर अगले चुनावों में प्रदर्शन नहीं दिखाया तो यह छवि फिर से फीकी पड़ सकती है। 6. नए विकल्प तलाशने वालों को मिलेगी ताकत 2025 के चुनाव और उसके बाद प्रशांत किशोर की यात्राओं ने कई युवा, शहरी, मिडिल क्लास और नाराज वोटरों में तीसरा विकल्प की उम्मीद जगाई थी। बांकीपुर में खुद मैदान में उतरकर उन्होंने इस उम्मीद को और मजबूत किया था। एक्सपर्ट पैनलः पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह, प्रियदर्शी रंजन, केके लाल, सत्यभूषण सिंह।