कर्नाटक में CM डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली दो महीने पुरानी कैबिनेट का पहला विस्तार सोमवार को हुआ। 19 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। नए मंत्रियों में से छह, सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली पिछली सरकार का हिस्सा थे। तीन पूर्व CM के बच्चे भी अब मंत्री हैं। ये हैं यतींद्र सिद्धारमैया (जो पहले से ही मंत्री हैं), कुमार बंगारप्पा (एस बंगारप्पा के बेटे) और अजय सिंह (एन धर्म सिंह के बेटे)। गायत्री का नाम था लेकिन शपथ नहीं ली राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने पीएम नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगदागी, रुद्रप्पा लमानी, के एस बसवंतप्पा, बी नागेंद्र, टी रघुमूर्ति, बी जेड जमीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड ,मधु बंगारप्पा,पुत्तुरंगाशेट्टी और एस एस मल्लिकार्जुन,अजय सिंह, एन चालुवरया स्वामी, के एम शिवलिंगे गौड़ा, एचसी बालकृष्ण , बसवराज रायरेड्डी , विजयानंद कशप्पनवर और लक्ष्मण सावदी को शपथ दिलाई।
गायत्री शांतेगौड़ा का नाम कांग्रेस हाई कमान की मंजूर की गई अंतिम सूची में था लेकिन उन्होंने शपथ नहीं ली, जिससे कर्नाटक मंत्रिमंडल में कोई महिला मंत्री नहीं रह गई। 3 जून को CM शिवकुमार और 13 मंत्रियों ने शपथ ली थी डीके शिवकुमार ने 3 जून को उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर और 12 अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। कर्नाटक में संवैधानिक रूप से मुख्यमंत्री सहित कुल 34 मंत्री हो सकते हैं। उधर, कर्नाटक कैबिनेट विस्तार में शामिल न किए जाने से नाराज, कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौडा वी. पाटिल ने सोमवार को अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। कर्नाटक में वोक्कालिगा, लिंगायत और कुरबा समाज अहम कर्नाटक में लिंगायत (लगभग 17%) सबसे बड़ा समुदाय है, जबकि दक्षिण कर्नाटक में वोक्कालिगा (लगभग 15%) का दबदबा है, जिसका नेतृत्व डी के शिवकुमार करते हैं। वहीं, कुरबा (लगभग 7-8%) समाज एक प्रमुख पिछड़ा वर्ग है, जिससें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आते हैं। वे अपनी अहिंदा राजनीति के जरिए मजबूत पकड़ रखते हैं। सिद्धारमैया के बेटे डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है।