जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में छेड़खानी का दावा करने वाली यशस्वी राजे ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भाषा पर आपत्ति जताई है। यशस्वी ने प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षामंत्री बनाया जाना एक मजाक बताया। यशस्वी राजे यूपी के फतेहपुर से भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी हैं। वह एक मॉडल हैं और दिल्ली में रहती हैं। उन्होंने ये बातें कतर के न्यूज चैनल अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहीं। यशस्वी राजे की 3 तस्वीरें देखिए… यशस्वी बोलीं- नए शिक्षा मंत्री को देखकर निराशा होती है यशस्वी ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भाषा देखिए। उन्होंने न तो अपनी गलती मानी और न उन्हें कोई पछतावा है। बल्कि उन्होंने खुद को पीड़ित या शहीद की तरह दिखाने की कोशिश की है। इस्तीफे को अहम जीत मानना, सच में छोटी सोच है। अब जिस व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया गया है, उसे देखकर निराशा होती है। यह फैसला किसी मजाक जैसा लगता है। CJP ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया, आंदोलन बड़ा बन गया कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शन के दौरान ऐसे लोगों को भी अपने से जोड़ा, जो आमतौर पर पॉलिटिक्स से दूर रहते हैं। उन्होंने मीम्स और नए तरीकों का अच्छा इस्तेमाल किया। उनका फोकस इंस्टाग्राम पर था। आम लोगों ने भी विरोध प्रदर्शन को सबसे ज्यादा शेयर किया। इसके चलते यह आंदोलन बड़ा बन गया। यशस्वी ने कहा- फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट हूं। पिछले साढ़े तीन साल से भारत में हूं और अकेले रहती हूं। मैं सालों से फतेहपुर नहीं गई हूं। मुझे जो कुछ कहना होता है, कहती हूं। दोगली बातें नहीं करती। यशस्वी ने कहा था- प्रदर्शन में एक व्यक्ति ने गलत तरीके से छुआ 27 जुलाई को यशस्वी राजे ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ छेड़छाड़ की गई। यशस्वी राजे सिंह ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि 24 जुलाई को वह अपनी बहन के साथ जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन में मौजूद थीं। उनके अनुसार, दोनों मुख्य मंच के पास खड़ी थीं, जहां प्रदर्शन चल रहा था। यशस्वी के मुताबिक, जब वह भीड़ के बीच से निकलने की कोशिश कर रही थीं, तभी एक बैरिकेड गिर गया। बैरिकेड गिरने के बाद वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। यशस्वी ने आरोप लगाया कि पीछे खड़े एक व्यक्ति ने उन्हें गलत तरीके से छूने और जबरदस्ती उनके पैरों के बीच हाथ डालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने उस व्यक्ति को तीन थप्पड़ मारे। यशस्वी ने अपनी पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें उम्मीद थी कि वहां मौजूद लोग उनका साथ देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने लिखा कि एक पुरुष वॉलंटियर उन पर ही लगातार चिल्लाता रहा कि वह वहां क्यों मौजूद थीं। वहीं दूसरे वॉलंटियर ने कथित तौर पर यह कहकर बात टाल दी कि ऐसी गलतियां तो होती रहती हैं। पिता फतेहपुर से विधायक रहे, दादा अफसर विक्रम सिंह उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की सदर विधानसभा सीट से 2 विधायक रह चुके हैं। एक बार उपचुनाव तो दूसरी आम चुनाव में जीते थे। उनका जन्म 20 मई 1967 को आगरा में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय आर.के. सेंगर रक्षा अधिकारी थे। पिता की नौकरी के कारण परिवार को विभिन्न शहरों में रहना पड़ा, जिससे उनकी प्रारंभिक शिक्षा अलग-अलग केंद्रीय विद्यालयों में हुई। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने प्रयागराज के इविंग क्रिश्चियन कॉलेज में प्रवेश लिया। यहीं से उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की और वर्ष 1987 में साइंस संकाय से छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। छात्र राजनीति के दौरान उनका संपर्क पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा से हुआ। बाद में वह पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के भी करीबी संपर्क में रहे। 36 दिन चला CJP का प्रदर्शन, प्रधान के इस्तीफे से खत्म 15 मई को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने बेरोजगारों को लेकर कॉकरोच वाला कमेंट किया। इसके खिलाफ सोशल मीडिया पर 16 मई को कॉकरोच जनता पार्टी बनी। 6 जून को इसे बनाने वाले अभिजीत दीपके भारत आए। 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक के मुद्दे को लेकर धरने पर बैठे। 36 दिन तक चला यह आंदोलन 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफे के बाद खत्म हुआ। प्रधान ने एक बयान में इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा- पिछले 10 दिन की घटनाओं ने उन्हें बहुत दुखी किया है और यह मुद्दा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है। इसके अलावा, छात्रों के साथ अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने भी 26 दिन की भूख हड़ताल सरकार के आश्वासन के बाद खत्म कर दी थी। ****************** यह खबर भी पढ़ें:- बच्ची के हत्यारोपी सिपाही को डॉक्टरों-नर्सों ने पीटा:पुलिस गोरखपुर जिला अस्पताल ले गई थी, यहीं से किडनैप किया था यूपी के गोरखपुर में 10 साल की बच्ची की हत्या के आरोपी 35 साल के सिपाही को डॉक्टरों और नर्सों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। गुरुवार दोपहर ढाई बजे पुलिस उसे मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची। उसे देखते ही अस्पताल के कर्मचारी भड़क गए और हमला कर दिया। पुलिसकर्मियों ने किसी तरह उसे छुड़ाया। पढ़ें पूरी खबर…