चंडीगढ़ में शनिवार को तीन दोस्तों की अर्थियां एक साथ उठीं। शाम करीब 5 बजे सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। तीनों के शव सुबह सेक्टर-30 स्थित उनके घर पहुंचे। जबकि चौथा दोस्त, जो बापूधाम कॉलोनी का रहने वाला था, उसका अंतिम संस्कार हरिद्वार में ही कर दिया गया। उसका परिवार मूल रूप से मध्य प्रदेश का रहने वाला है। अंतिम संस्कार के बाद परिवार अस्थियां विसर्जित कर मध्य प्रदेश जाएगा। चारों दोस्तों की शुक्रवार को हरिद्वार की गंगनहर में डूबने से मौत हो गई थी। वे कांवड़ के लिए गंगाजल भरकर चंडीगढ़ लौट रहे थे। रास्ते में गंगनहर में नहाने के दौरान एक युवक तेज बहाव और दलदली मिट्टी में फंसकर डूबने लगा। उसे बचाने के लिए उसके तीन साथी भी गहरे पानी में कूद गए, लेकिन देखते ही देखते चारों की डूबने से मौत हो गई। उधर, सेक्टर-30 निवासी नीतिश की मां ने बताया कि उनका बेटा पहली बार कांवड़ लेने गया था। उन्हें सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि उन्होंने उसे जाने की अनुमति दी। नीतिश ने भोलेनाथ की कसम देकर भरोसा दिलाया था कि वह न तो गंगनहर में नहाने उतरेगा और न ही कोई जोखिम उठाएगा। सोमवार (3 अगस्त) को होने वाले जलाभिषेक की तैयारियां भी अधूरी रह गईं। जिस शिव मंदिर में चारों दोस्तों को गंगाजल चढ़ाना था, वहां भव्य तैयारियां चल रही थीं। परिवारों की ओर से मंदिर के बाहर टेंट और अन्य इंतजाम किए जा रहे थे, लेकिन हादसे के बाद खुशियों की जगह मातम छा गया। पहले 4 पॉइंट में जानिए हादसा कैसे हुआ… अब चारों युवकों के बारे में विस्तार से जानिए… मन्नतों के बाद हुआ था नीतीश का जन्म नीतिश के पिता टेलर हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। उसकी एक बहन भी है। पड़ोसियों ने बताया कि वह काफी मन्नतों के बाद पैदा हुआ था। परिजनों ने बताया कि नीतीश पहली बार हरिद्वार कांवड़ लेने गया था। मां उसे भेजना नहीं चाहती थीं, लेकिन उसने भोलेनाथ की कसम देकर भरोसा दिलाया था कि वह पानी में नहीं उतरेगा और पूरी यात्रा में सावधानी रखेगा। मां हर दो-तीन घंटे बाद फोन कर उसका हाल जानती थीं। नीतिश उन्हें समझाता था कि उसके साथ पहले भी कांवड़ ला चुके दोस्त हैं, इसलिए चिंता करने की जरूरत नहीं है। अब मां यही कह रही हैं कि अगर बेटे की जिद न मानी होती तो वह आज उनके सामने होता। मां को बेटे की मौत की जानकारी नहीं थी मृतकों में 18 वर्षीय भरत के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार में मां, छोटा भाई और बहन हैं। मां मजदूरी कर घर चलाती हैं और उन्हें उम्मीद थी कि बेटा बड़ा होकर परिवार की जिम्मेदारी संभालेगा। हादसे के बाद भाई और रिश्तेदार हरिद्वार चले गए थे, लेकिन मां को बेटे की मौत की जानकारी नहीं दी गई थी। वह बार-बार पूछती रही कि घर के बाहर इतनी भीड़ क्यों जुट रही है। परिजन उन्हें केवल इतना बताते रहे कि बेटे का एक्सीडेंट हुआ है। शिवांशु की बहन अब भी भाई का इंतजार कर रही शिवांशु के परिवार में माता-पिता और एक छोटी बहन है। हादसे की सूचना मिलते ही माता-पिता हरिद्वार चले गए। घर पर अकेली बहन बार-बार पूछ रही है कि भाई कब आएगा और मम्मी-पापा उसे लेने क्यों गए हैं। पड़ोसी उसे यही समझा रहे हैं कि भाई का एक्सीडेंट हुआ है और माता-पिता उसे लेकर लौटेंगे। वह 12वीं में पढ़ता था। उसके पिता का पिता कॉस्मेटिक का कारोबार है। रोहित के पिता लगाते हैं परांठों की रेहड़ी रोहित के पिता चंडीगढ़ के सेक्टर-29 में परांठों की रेहड़ी लगाते हैं, जबकि परिवार बापूधाम कॉलोनी में रहता है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। रोहित क्या करता था इसका पता नहीं लग पाया है। पार्षद बोलीं- ये गरीब परिवार हैं इलाके की पार्षद तरूणा मेहता ने बताया कि वह 31 जुलाई को नगर निगम की हाउस मीटिंग में थीं। दोपहर करीब दो बजे चार युवकों के डूबने की सूचना मिली तो वह तुरंत मीटिंग छोड़कर सेक्टर-30 पहुंचीं। उन्होंने कहा कि मृतक सभी गरीब परिवारों से हैं और उनके घर बड़ी मुश्किल से चलते हैं। प्रशासन मदद करे या न करे, वह निजी तौर पर इन परिवारों के साथ खड़ी रहेंगी। ————— ये खबर भी पढ़ें… चंडीगढ़ से कांवड़ लेने हरिद्वार गए 4 दोस्तों की मौत, नहर में नहाने उतरे, एक को बचाने के लिए तीन कूदे; तेज बहाव में बहे चंडीगढ़ से हरिद्वार कांवड़ लेने गए 4 दोस्तों की शुक्रवार को गंगनहर में डूबने से मौत हो गई। सूचना मिलते ही जल पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। गोताखोरों ने चारों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। हादसा शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ। (पढ़ें पूरी खबर)

चंडीगढ़ में एक साथ उठीं 3 दोस्तों की अर्थियां:मां ने नहीं दी जाने की अनुमति, तो भोलेनाथ की कसम देकर हरिद्वार गया था बेटा
चंडीगढ़ में शनिवार को तीन दोस्तों की अर्थियां एक साथ उठीं। शाम करीब 5 बजे सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में […]